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उम्र कैद की सजा वास्तव में कितने साल की होती है...?

उम्र कैद की सजा वास्तव में कितने साल की होती है...?


   जब कोई भ्रांति फैल जाती है तो वो बड़े व्यापक स्तर पर फैलती है... उसका जनमानस पर बहुत गहरा असर पड़ता है... गलत और तथ्यहीन बात बहुत जल्द फैल जाती है, ऐसे बातें लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है... फिर चाहे लाख कोशिश क्यों ना कर लीजिए... लोग गलत को ही सच मानेंगे...! ऐसी ही भ्रांति भारत में उम्रकैद की सजा को लेकर फैली हुई है... आम धारणा है कि उम्रकैद की सजा 14 साल ही होती है... जबकि ऐसा नहीं है..!

मारू राम वर्सेज भारत सरकार के केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के वकीलों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उम्रकैद का मतलब मुजरिम को पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी पड़ेगी... संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि उम्रकैद की सजा 14 साल है... उम्रकैद का मतलब जीवन भर जेल में ही रहना होगा... मारूराम और उसके साथी 1981 से हत्या के मामले में जेल में बंद हैं, और उनके वकीलों ने उनकी जेल में बिताई गई 14 वर्ष की अवधि के बाद उनको रिहा करने के लिए एक याचिका दायर की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया...!

IPC के सेक्शन 45 में ये उल्लेख किया गया है कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद ही होता है... इस सजा में मुजरिम को सारी उम्र जेल जेल में ही रहना होगा... इसमें कोई रियायत नहीं है...! 

 सजा सुनाए जाने के बाद कैदी की सारी जिम्मेदारी सरकार की होती है... उसके रहने, खाने, कपड़े वगेरह की... IPC के सेक्शन 433A के तहत सरकार कैदी के जेल में व्यवहार और आचरण को देखते हुए उसकी सजा कम कर सकती है... जेल मैनुअल 14 वर्ष या उसके बाद कभी भी कैदी के विषय में सरकार की रिव्यू कमिटी के पास अपना एक डॉक्यूमेंट भेजती है, रिव्यू कमिटी कैदी के केस और उसके जेल में किए गए व्यवहार को देखते हुए... राजूयपाल के पास भेज देती है, फिर कैदी को रिहा किया जा सकता है...! 

Cr PC के सेक्शन 72 में राष्ट्रपति को और सेक्शन 161 में राज्यपाल को किसी भी सजायाफ्ता मुजरिम की सजा कभी भी माफ या कम करने की शक्ति देता है...!  

भारत के संविधान में कहीं भी नहीं लिखा है कि उम्रकैद की सजा 14 वर्ष ही होगी...! राज्यपाल या राष्ट्रपति को विभिन्न धाराओं के तहत ये अधिकार प्राप्त है कि वे अपने विवेक के आधार पर सजा कम या माफ कर सकते हैं... मुजरिम को किसी भी तरह का अधिकार नहीं है कि वो 14 वर्ष से अधिक सजा नहीं काटे...! 


14 साल के बाद सरकार मुजरिम की बीमारी, पारिवारिक मुद्दे या किसी वाजिब कारण से मुजरिम को रिहा कर सकती है, अन्यथा आजीवन जेल काटनी पड़ेगी... 14 साल से पहले सरकार या जेल प्रशासन किसी भी कीमत पर सजा कम नहीं कर सकते...! 

कई बार जेल में अधिक कैदी या किसी फेस्टिवल के अवसर पर उम्र कैद की सजा पाए कैदी रिहा किए जाते रहे हैं..! 14 वर्ष बाद कई लोग कैदियों को रिहा नहीं करने के कारण विरोध करते हैं, जिसका कोई आधार नहीं होता...! उम्रकैद की सजा 15 साल भी हो सकती है और 50 साल भी... जब कोर्ट ये कहता है कि मुजरिम को उम्र कैद की सजा दी जाती है तो उसका मतलब ये होता है कि मुजरिम को पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी होगी...! बाद में सरकार के विवेक पर निर्भर है कि वो 14 साल के बाद कभी भी उसकी बाकी की सजा माफ कर सके...! 

ये थी जानकारी उम्र कैद के विषय में... इसपर आप क्या सोचते हैं... कमेंट करके जरूर बताइए...!

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